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ब्याज  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
देखो 'व्याज' (रू.भे.)
  • उदा.--1..मन मांणक गहणौ धर्‌यौ, मिंत तुमारै पास।ंनेह ब्याज अति बाढ़ियौ, नहिं छूटण की आस।--अज्ञात
  • उदा.--2..ब्याज नै काटा रौ चक्कर इसौ नहीं चालतौ कै लियौ जिण सूं दसगुणौ चुकायां पछै ई फारगती मिळती कोयनी।--रातवासौ
  • उदा.--3..आज काल रा साधड़ा, ब्याज बुहारण बेस। राज मांय झगड़ै रुगड़, लाज न आवै लेस।--ऊ.का.


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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