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भाप, भाफ  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.स्त्री.
सं.वाष्प
1.किसी तरल पदार्थ, विशेषत: पानी, का उष्णता पाकर खौलने के प्राप्त वह वाष्पीय रूप, जिसका आजकल शक्ति के साधनों में उपयोग होता है। क्रि.प्र.--उठणी, निकळणी, बणणी।
  • मुहावरा--भाप लैणी=सेक करना।
2.किसी द्रव की वह अवस्था जो उसके अधिक ताप से अथवा किसी रासायनिक प्रक्रिया द्वारा वायु में विलीन होने से प्राप्त होती है। (भौतिकशास्त्र)
3.मुंह से निकलने वाली हवा।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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