सं.पु.
सं.भ्रमर:
1.काले रंग का पतगा, जो भूं--भूं की ध्वनि करता हुआ उड़ता है, भौरा। (ह.नां.मा.)
- उदा.--अहि--वेल पत्र कप्पूर सुक्ख, तंबोल लाल सोहंत मुक्ख। आघ्रांण छभा परिमळ असंख, गुंजारव डंबर भ्रमर पंख।--गु.रू.बं.
- उदा.--2..चणणंकै भड़ चिहुर, छीजि कातर छणणंकै। टणणंकै टांमक, भ्रमर फीलां भणणंकै।--वं.भा.श्याम रंग।
5.दोहे का एक भेद, जिसमें 22 गुरु तथा 4 लघु वर्ण होते है।
6.छप्पय छंद का 65 वां भेद, जिसमें 6 गुरु और 140 लघु से 146 वर्ण या कुल 152 मात्राएं होती है।
7.देखो 'भंवर' (2) (रू.भे.)
- उदा.--गुण सागर दुस्तर अगाध, अति बाध अपारण। वेळ निजर विद्दुसां, असह कवि भ्रमर अकारण।--रा.रू.
रू.भे.
भंग, भंमर, भंवर, भमग, भमण, भमर, भरूमर, भंवर, भवर।--
अल्पा.
भंमरौ, भंवरौ, भंवरियौ, भंवर्यौ, भंउरौ, भमरड़ौ, भमरडउ, भमर्यौ, भवरियौ, भवर्यौ, भमरलउ, भमरलौ, भमरियौ, भमरौ, भौरौ। मह.--भंमराळ, भमरांण।