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मठ  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.पु.
सं.मठं, मठ
1.वह स्थान जहां दशनामी साधु अपने गुरु के साथ रहते हों।
2.दशनांमी सन्यासियों के किसी बड़े साधु का निवास स्थान।
3.वह स्थल जहां विद्यार्थी दीर्घावधि तक रहकर ज्ञानार्जन करते थे। (प्राचीन)
  • उदा.--अथ नगर वर्णनं,.........भांडागारिक, कोस्टाकार सत्राकार मठ विहार प्रपामंडप त्रिक चतुएक चत्वर चतुस्पथ राजमारग..........सरोवर।--व.स.
4.देवी का मंदीर।
  • उदा.--1..जद रावजी गढ छोड स्रीमाताजी करणीजी रै मठ गया।--ठाकुर जैतसी री वारता
  • उदा.--2..मठ अंदर सुंदर मूरत्ती, स्रीकरणी जय जयति सकत्ती।--मे.म.
5.गर्व, अभिमान।
  • उदा.--भूपकां मौडा माठां, मठ भांन रै। ईढ मघवांन रै, ब्रवण आथां।--लिछमणसिंह सीसोदिया रौ गीत
  • मुहावरा--मठमारणौ=गर्व खंडित करना।
6.छवि, षोभा।
  • उदा.--1..म्हैं जांणतौ के उण कमसल छोकरी रै परवांण सोरै सास दूजो उणियारौ लाधैला कोनी। अर लाध्यौ तौ अैड़ौ लाध्यौ के उणरा रूप रौ सगळौ मठ ई मार दियौ।--फुलवाड़ी
  • उदा.--2..पण औ डकरेल चोर तौ बाड़ी री सोभा रो जांणै मुळगौ मठ ई मार दियौ।--फुलवाड़ी
  • मुहावरा--मठ बिगाड़णौ, मठ मारणौ--शोभा नष्ट करना।
7.आनन्द, खुशहाली, मजा।
  • उदा.--1..नसौ तौ संगत मांगै। झांझरकै दो घड़ी रात थकां ऊछतौ नै भांग सूं माथा--फोड़ी करतौ। नसा रौ सैंग मठ मार्‌यौ जावतौ।--फुलवाड़ी
  • उदा.--2..रांम मार्‌या बात रै बिचाळै हुंकारौ तौ दिया कर। बिनां हुंकारै बात रौ सगळौ मठ ई मर जावै।--फुलवाड़ी
8.महत्त्व।
  • उदा.--नसा में बड़बड़ावण लागौ--लुगाई लाज--सरम छोडनै फीटी व्है जावै तौ सगळा आणद रौ मठ मर जावै।--फुलवाड़ी
9.ऊंचा लम्बा टीला।
  • उदा.--लकड़ी थांरी रीढ़ लास रौ भावळ लै'रा। ढिस्सा मठ ढम ढेर, ईळ जल ऊंडा वेरा।--दसदेव
10.कृपण, कंजूस।
  • उदा.--1..महण सुभावां कमंद गुर तायजादौ मठां, खगां बळ दली दळ खायजादौ। पायजादौ सुजस सायजादौ पनौ। रायजादां मुगट रायजादौ।--मेगराज आढौ
  • उदा.--2..चाचर चरू सुकाळ, जग 'अभमल' 'चूडा' जिहीं। खलक चरू जळ खाळ, मठा पहां वहिया मगज।--सू.प्र.
रू.भे.
मंठ, मट्ट, मट्ठ।
वि.--


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






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