HyperLink
वांछित शब्द लिख कर सर्च बटन क्लिक करें
 

मधुपरक  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.पु.
सं.मधुपर्क
1.दही, घी, शहद, जल और चीनी का समाहार जो शज्ञ आदि मे आहुति देने और देवताओं को भोग लबाने के लिए प्रयोग में लाया जाता है।
  • उदा.--1..पच्छिम दिसि पूठ पूरब मुख परठित, परठित ऊपरि आतपत्र। मधुपरकदि संस्कार, मंडित, त्री वर वे बैसांणि तत्र।--वेलि.
  • उदा.--2..औपै वेद जमणिका आगै, ज्वाळ अमळ वेदी मधि जागै। मधुपरकादि सरस रस माधुर, संसकार परखै देवासुर।--रा.रू.


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

Project | About Us | Contact Us | Feedback | Donate | संक्षेपाक्षर सूची