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मनु  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.पु.
सं.
1.ब्रह्मा का पुत्र जो, मानव सृष्टि का प्रवर्तक आदि पुरुष एवं समस्त मानव जाति का पिता माना जाता है। वि.वि.--यह यज्ञ प्रथा का आरंभकर्ता माना जाता है। ऋग्वेद के अनुसार विश्व में अग्नि प्रज्वलित करने के बाद सात पुरोहितों के साथ इसने ही सर्वप्रथम देवों को हवि समपित की थी। मनु ने सभी लोगों के प्रकाश हेतु अग्नि की स्थापना की थी। मनु का यज्ञ वत्रमान यज्ञ का ही प्रारंभक है क्यों कि इसमें बाद जो भी यज्ञ किये गये उनमें इसके द्वारा दिये गये विधानों को ही आधार मान--कर देवों को हवि समपित की गयी। बड़अन्य विधान भी इसी के अनुसार किये जाते है कई विद्वानों ने इसे तथा 'मनु बैवस्वत' को एक ही माना है, परन्तु इसमें काफी मतभेदहै। (च.को.)
2.चौहद मन्वंतरों के अधिपति। वि.वि.--पुराणानुसार ब्रह्मा के एक दिन और रात को कल्प कहते है। इनमें ब्रह्मा के एक दिन के चौहद भाग माने गये है। प्रत्येक भाग को एक मन्वंरत कहते है। प्रत्येक मन्वन्तर के काल में सृष्टि का नियंत्रण करने वाला मनु अलग होता है और इसी के नाम से मन्वंतर का नाम--करण किया गया है। अत: ये चौदह मन्वन्तर एवं मनुओं के नाम इस प्रकार है।--
1.स्वायंभुव।
2.स्वारोचिष।
3.औत्तम।
4.तामस।
5.रैवत।
6.चोक्षुष।
7.वैवस्वत।
8.सावणि (अकंसावणि)।
9.दक्षसावणि।
10.ब्रह्मसावणि।
11.धर्मसावणि।
12.रूद्रसावणि।
13.रौच्य।
14.भौत्य।
15.उपर्युक्त प्रत्येक मनवन्तर की काल मर्यादा चतुर्युगों के इकहत्तर भ्रमण माने गये है। चतुर्युगों की काल मर्यादा 43, 20, 000 मानुषी वर्ष माने गये है। इस प्रकार प्रत्येक मन्वंतर की काल मर्यादा 43, 20, 000+71 मानुषी वर्ष होती हे। मनु प्रत्युक का राजा होता है जिसकी सहायतार्थ सप्तषि, देवतागण, इन्द्र, अवतार एवं मनुपुत्र रहते है। (च.को.)
3.ब्रह्मा।
4.विष्णु।
5.अग्नि।
6.मंत्र।
7.एक रुद्र का नाम।
8.यज्ञ। (अ.मा.)
9.अन्त:करण।
10.जैनों के जिनदेव।
11.एक राजा, जिसके राज्यकाल में प्रलय हुआ तथा विष्ण, ने मत्स्यावतार लिया था।
12.'मनुस्मृति' नामक ग्रन्थ के रचयिता।
13.एक अर्थशास्त्रकार।
14.एक अग्नि विशेष जो तप नाम धारण करने वाले पांचजन्य नामक अग्नि का पुत्र था।
15.एक ऋषि जो कृशाश्व ऋषि का पुत्र था। इसकी माता का नाम धिषणा था।
16.एक यादव राजा, जो वायु पुराण के अनुसार मधु राजा का पुत्र था।
17.एक यादव राजा, जो मत्स्य पुराण के अनुसार लोमपाद राजा का पुत्र था। इसके पुत्र का नाम ज्ञाति था।
18.एक इक्ष्वाकु वंशीय राजा, जो शीघ्र राजा का पुत्र था।
19.धर्मसावणि मनु के पुत्रों में से एक।
20.अंगिरा कुलोत्पन्न एक गोत्रकार।
21.चौदह की संख्या। * (डिं.को.) सं.स्त्री.(सं.मनु:)
22.मनु की स्त्री मनावी।
23.एक अप्सरा जो कश्यप एवं प्राधा की कन्या थी।
24.वन मेथी।
रू.भे.
मणु, मनं, मनू।
25.देयो 'मन' (रू.भे.)
  • उदा.--1..गिउ कौरवाधिपति सैन्य समस्त हारी। गिउ पारथ उत्तर साहउ मनु हरस भारी।--सालिसूरि
  • उदा.--2..पंखेरू परदेसियां रे, नवि सरज्यउ नित वास। तनु छइ साथी माहरइ रे, मनु छइ तोरइ पास।--स.कु.
26.देखो 'मानौ' (रू.भे.)


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






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