सं.पु.
सं.मरुत्, मरुत:
1.वायु, पवन। (अ.मा.)
5.एक देवगण, इनकी संख्या उनच्चास मानी गई है। ये कश्यप और दिति के युत्र थे। वि.वि.--कश्यप से उत्पन्न दिति के सभी पुत्र विष्णु द्वारा मारे गये तौ दिति ने कश्यप से वर मांगा कि 'इन्द्र को मारने वाला एक अमर पुत्र मुझे प्राप्त हो। कश्यप ने दिति को यह वर दे दिया। इन्द्र को जब यह पता चला कि दिति अपने गर्भ में उसका कालपाल रही है तौ वह साधु वेष में दिति के पास रहने लगा। एक बार मौका पाकर योगबल से उसने दिति के गर्भ में प्रवेश किया और उसके गर्भ को नष्ट करने के लिये उसके सात छुकड़े कर डाले। परन्तु जब वे नहीं मरे तो उन सातों के सात सात टुकड़े और कर डाले। (इस प्रकार ये उनच्चास हो गये) इस पर भी जब वे नहीं मरे तो इन्द्र ने समझ लिया कि वे किसी देवता के अंश है। अत: उसने इन्हे अपने भाई मान लिये। कालान्तर में दिति के जबउनच्चास पुत्र उत्पन्न हुए तो वह आश्चर्य चकित हो गयी और इन्द्र से इसका कारण पूछा। इस पर इन्द्र ने अपना रहस्य दिति को बताया और उसके सभी पुत्रों को स्वग्र में ले गया। वहां उन्हे खज्ञ के हविभगि का अधिकारी बना कर भाई की भांति रक्खा।
7.पहाड़, पर्वत। (अ.मा., ह., ना.मा.)
9.एक महषि, जिसने शान्ति दूत बन कर जाने वाले श्रीकृष्ण की परिक्रमा की थी।