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मलेच्छ, मलेछ     (स्त्रीलिंग--मलेच्छी, मलेछणी)  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.पु.
सं.म्लेच्छ
1.आर्य संस्कृति के अनुसार मनुष्य की वे जातियां या वर्ग जिसमें वर्णाश्रण धर्म न हो, शूद्र।
  • उदा.--1..जिसो अग्नि माहि उचिस्ट होम करै छै। कि जिसौ सालिग्रांम सूद्र का ग्रह कै विखै। कि जिसौ मलेछ के मुखि वेदमंत्र।--वेलि.टी.
  • उदा.--2..आगै कोई गुजराती लोक भील मलेछ रैहता सु सारा देर कीया।--नैणसी
2.यवन, मुसलमान।
  • उदा.--1..पढावौ कुरांण आछा बएावौ मलेछ पाता। समापां जागीरी लाख लख रौ सांमांन।--गोकळदास सक्तावत रौ गीत
  • उदा.--2..वौ दातार है, सूरवीर है, दोनूं पख ऊजळा हे, पनें मलेछ मुसळमानां रौ चाकर नहीं। मुसलमांनां सूं सगारथ नहीं।--वीर सतसई की टीका
3.अनार्य।
4.जाति बहिष्कृत।
5.तांब।
6.अस्पष्ट या जंगलियों की तरह बालने की क्रिया। वि.--
1.निकृष्ट, नीच, हीन, हेय।
  • उदा.--अमूछा मलेछा वली मन्न खोटा, जियां चक्खु चुचां लुल्या गाल गोटा।--ध.व.ग्रं.
2.गंदा, मेला।
3.अस्पष्ट या जंगलियों की तरह बोलने वाला।
रू.भे.
मलिच्छ, मलियेच, मलीच।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






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