पु.
सं.
1.सिर, माथा, मुण्ड। (ह.नां.मा.) (उ.र.)
- उदा.--1..जननी तूझ हस्त मस्तक जिहं। त्रिदक्षालय सुख वसत निलय तिहं।--मे.म.
- उदा.--2..भारथ बरंग हुवौ धण भिड़तां, सत्र साझंतां बाहतां सार। हर महरांण तणौ मस्तक हद, जड़िया गति मेळै जटधार।--जोगीरांम हाडा रौ गीत
- उदा.--3..धरणीधर संकर देव धियावउ, जोति प्रकास अलोप जग। मस्तक मुगट प्रकास मांकडउ, अनंत कोट व्रहमंड लग।--महादेव पारवती री वेलि
2.भाग्य, तकदीर।
- उदा.--सो बैरी कटवण मिळै, मस्तक लिख्या सो होय। लेख लिख्या कू बाळका, मेट न सक्कै कोय।--अज्ञात
रू.भे.
मसतक, मसतक्क, मसतग, मस्तकु, मस्तक्क, मस्तग, मस्तगि, मस्तगी, मस्तिकि।