सं.पु.
सं.
1.किसी संप्रदाय या मठ का अधिष्ठाता, आचार्य, प्रधान साधु।
- उदा.--1..एकै जय जीह लहै कुण अंत, पारौ नंहं प्रांभै सेस पुणंत। मुनेसर ध्यांन धरंत महंत, अखै जुग हेकौ ही नांम अनंत।--ह.र.
- उदा.--2..महंत जी कीं ऊंचा सुणता हा। जोर सूं बोलनै पूछ्यौ कुण चालतौ रह्यौ?--फुलवाड़ी
2.शिष्य परंपरा के अनुसार किसी गुरु गादी का अधिकारी, गद्दीधारी।
3.ब्राह्मण, पंडित। वि.--प्रधान, मुखिया।