सं.पु.
अ.
1.रहस्शय या भेद, मर्म।
- उदा.--प्यारा महरम दिल की जांणै, और न जांणै कोई बात नैं। मीरां दरसन कारण ढूरै, ज्यूं बालक झूरै मात नै।--मीरां
2.जो जनान खाने में जा सकता हो।
5.कन्या की दृष्टि से वह सम्बन्धीया व्यक्ति जिससे उस कन्या का विवाह जायज न हो। (मुसलमान)
6.जानकारी।
- उदा.--हरिया निज निरकार की, महरम बिन गम नांहि। एक अखंडी होत धूनि, सुनि सिखर कै मांहि।--स्री हरिरांमदासजी महाराज