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मिस्सी  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.स्त्री.
फा.मिसी
1.माजूफल, ला हचून, तूतिया आदि के योग से तैयार किया जाने वाला एक मंजन जिससे स्त्रियां दांत व होठ रंगती है।
2.मु लमान वेश्या के पहले--पहल किसी पुरुष स समागम करने पर किया जाने वाला उत्सव। इस समय उसक मिस्सी लगाते हैं। वि.वि.--इसे सिर ढ काई या नथ--उतराई की रश्म भी कहते हैं।.भे.--मसि, मसी, मस्सी, मिसी।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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