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मुक्त  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
वि.
सं.
1.जो बंधन से छूट गया हो, स्वतंत्र आजाद।
2.जो सांसारिक बधनों से अलग हो, जो सामजिक बंधनों से अलग हो।
  • उदा.--1..मन दे मरजीवन के मग में, जनजीवन मुक्त फिरे जग में, फरियाद हिये घरले फिर ले। बस वे जन हैं सरले विरले।--ऊ.का.
  • उदा.--2. जपै जगदीस सजीवन जुक्त, महा धन जे जनजीवन मुक्त--उ.का.
3.जो मरण जीवन से छूट कर मोक्ष पा गयां हो। छूटा हुआ।
  • उदा.--ताहरां लाखैजी राखाईत नूं नजीक अणायौ, माथा उपर हाथ दियौ। जीव मुक्त हुवौ।--नैणसी
4.जो पराधीन न हो।
5.जो त्याग दिया गया हो, फैक दिया हो।
6.प्रदत्त।
7.गिरा हुआ।
सं.पु.
1.एक ऋषि।
2.देखो 'मुक्ति' (रू.भे.)
  • उदा.--गुरु आप अग्यांनी जुगत न जांणी: चेता मुक्त चहंदा है। करणी रा काचा साध न सांचा, बाचा बहोत बकंदा है।--ऊ.का.
रू.भे.
मुक्त, मुक्क, मुक्ख, मुगत, मुगत्त


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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