सं.स्त्री.
1.पृथ्वी। (नां.डिं.को.) सं.पु.--
3.आभूषण, अलंकार, भषण। (अ.मा.)
1.इण पाप रा भार सूं जित्तौ वेगौ
मुगत करौ तौ म्हारौ औ बिगड़ियोड़ौ जमारौ थोड़ौ घणौ सुधरै।--फुलवाड़ी
- उदा.--2..जे कोई माई रौ लाल वांमणी री सुध लेवण ने आय जावै, उण रौ मोल अर सोळै बरसां रौ खरचौ चुकायनै इण नै आपरै साथै लेय जावै तौ वा इण पाप करम सूं मुगत व्है जावै।--फुलवाड़ी
- उदा.--3..सकल सुराससुर वंदित पदकज, पुण्यलता घन पाथ। समयसुंदर कहइ तेरी क्रपा तें, होत मुगत सुख हाथ।--स.कु.
- उदा.--4..काळिदर दूध रै उनमांन धवळ हंसी हंसतौ बोल्यौ--आ बात अंगै ई सोच करै जैड़ी नीं है। इणसूं म्है सराप मुगत व्है जांउला।--फुलवाड़ी
5.देखो 'मुक्ति' (रू.भे.)
- उदा.--1..सुणनें कथा मुगत हरि दीनीं, चाल्या विकळ अगाऊ जी,--गी.रां.
- उदा.--2..भैरव देव अदेव भलांई, निरखौ फिर फिर नैनां। मुगत तणी साता रौ मालिक, हरि बिन दाता है नां।--र.रू.
- उदा.--3..छटा अलोकिक छाय, ऊंची लहरां षपड़े। मुगत निसेणी माय, सुखदेणी असुरां सुरां।--बां.दा.
- उदा.--4..ऐसी कही हेतु जुगत ए, तिण मुं वेगी मिलै मुगत ए।--जयवांणी