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मैण  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
1.चूड़ामणि , सिर का आभूषण।
  • उदा.--दुवै पाव वंदै हणूं मैण दीधी। कपीसां हणूं पां तारीफ कीधी।--सू.प्र.
2.देखो 'मैण' (रू.भे.) (अ.मा.)
  • उदा.--1..मावड़ियां तन मैण रा, मिटै कद नंह मांद। मावड़ियां ढूलरा मरद, चूला हंदा चांद।--बां.दा.
  • उदा.--2..मैण लगा पालड़ां, तोलां माहि कसूर। डर तज राखै डांडियां, पारद हूंता पूर।--बां.दा.
3.देखो 'मदन' (.भे.)
  • उदा.--वणै चारु आभास वदनारविंदं, उरै ऊपज वेख रेखा अणंदं। सदा हेत संतां इसा नेत सोहै महा मैण रूपी तिका नैंण मोहै।--र.रू.


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






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