HyperLink
वांछित शब्द लिख कर सर्च बटन क्लिक करें
 

मोयूं, मोरू  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
देखो 'मोरौ' (रू.भे.)
  • उदा.--1..वीडड़ियां मन माहरूं रे, दुख धरइ दिन दिन्न। के तूं जांणइ केवली रे, के वलि मौरू मन्न।--स.कु.
  • उदा.--2..तरू तरू त्रुठइ पंन्नडां, गिरि गिरि प्ुटइ वांहु। फागुण कागुण ताहरू, नीगमिउ मौरू नाह।--मा.कां.प्र.
2.देखो 'मौरौ' (रू.भे.)

मोरू  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
1.देखो 'मोर' (रू.भे.)
  • उदा.--मुनमथ का इंदका मुनेस्वरूं का मन मोहै। फलफूलू के भार भरी अढ़ार भार। ठांम ठांम के ऊपर मोरू का तंडव भौरूं का गुंजार।--सू.प्र.
2.देखो 'मोरौ' (रू.भे.)
  • उदा.--मोरू मन अस्टापद सुं मोह्‌यु, फटित रतन अभिरांम मेरे लाल।--स.कु.


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

Project | About Us | Contact Us | Feedback | Donate | संक्षेपाक्षर सूची