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रंभा  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.स्त्री.
सं.
1.इन्द्रलोक की एक अप्सरा, जो नल कूबर की स्त्री थी और अद्वितीय सुंदरी थी। यह कश्यप एवं प्राधा की पुत्री थी।
  • उदा.--1..सूकेसी उरवसी, घ्रितेची मैना रंभा। इंद्रलोक अपछरा, इसी उणहारि असंभा।--गु.रू.बं.
  • उदा.--2..हंसगमणी, साख्यात पदमिणी, आभै री बीज, भादुवै री आकास परी, मोत्यां सरी, सोना री कांब, किरत्यां रौ झूमकौ, इंद्रलोक री अपछरा। रूप री रंभा। चित्रांम री पूतळी।--फुलवाड़ी
2.इंद्रलोक की परी, अप्सरा। (नां.मा.)
  • उदा.--1..बाजिंद तांण विमांण भांण तक रहैं अचंभा। वीर बड़ाळां वरण रचै वरमाळां रंभा।--र.रू.
  • उदा.--2..'अभमाल' आप छळि करि अचड़, वप विहंडाय रंभा बरूं।--सू.प्र.
3.पार्वती, गौरी।
  • उदा.--नमौ रूप नद्दा सबद्दा रसीली, नमौ लच्छि रंभा नमो वौम लीली। नमौ मोहणी कंमळा मूख मूंनी, नमौ धोम धूतारणी संभ धूनी।--मा.वचनिका
4.मयदानव की पत्नी व मंदोदरी की माता।
5.प्रेमिका।
  • उदा.--घट मैं देख्या एक अचंभा, आपौ आपी खेलै रंभा। घट मैं खूल्हा केवळ नांमा, वाचैं राचै आतम रांमा।--अनुभववांणी
6.वेश्या, रंडी।
7.उत्तर दिशा।
8.कदली, केला। (डिं.को.)
रू.भे.
रंब, रंभ।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






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