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रढ  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.पु.
1.हठ, जिद्द।
  • उदा.--1..तरै कांनड़दै तो घणूं ही कह्यौ-वे कुण? म्हें कुण? पण बैर रढ मांड रही।--नैणसी
  • उदा.--2..स्त्री बालक पुहोवी धणी रै, ए तिहुं एक सभाव। रढ नवि छांडै आपणी रे, भावें तौ घर जाय।--प.च.चौ.
2.गर्व, अभियान।
  • उदा.--रढ मेटण रांमण रढरांण।--ह.नां.मा.
3.अहंकार। (अ.मा., ह.नां.मा.)
4.कष्ट, संकट।
5.बल, शक्ति, पौरुष। वि.--
1.आन-बान वाला, महान्‌, बड़ा।
2.वीर, बलवान।
3.द्दढ़, मजबूत।
रू.भे.
रंढ, रड, रड्ड, रढि, रढु, रढू, रढ़।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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