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रद्द  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
वि.
अ.
1.निरस्त, खारिज, रद्द।
  • उदा.--ठाकर आपरी आंट में पट्टौ कर दियौ तौ कांई व्है, बांणियौ आपरी अकल आपै जद चावै तद उणनै रद्द कर सकै।--फुलवाड़ी
2.जिसे निरर्थक मान लिया गया हो, व्यर्थ, अप्रयोज्य।
3.परिवर्तित, बदला हुआ।
4.नापसंद।
5.दूषित।
6.हीन, न्यून।
  • उदा.--हालै दळ हद्दं जांणि जळद्दं गयण गरद्दं मिळि तद्दं। फतै सिरि हद्दं, रैण रहद्दं रांवां मद्दं थिय रद्दं।--गु.रू.बं.
7.पराजित।
  • उदा.--राजा दखिण विराजियौ, गा दखणी हुइ रद्द। साह सुपारिस सांभळै, की फत्तै सरहद्द।--गु.रू.बं.
8.देखो 'रद' (रू.भे.)
  • उदा.--उर कोप आंणे अप्रमांणे सिद्ध जांणे सद्दयं। ओपै अखाड़ै गै उडाड़ै रूक झाड़ैरद्दयं--रा.रू.
9.देखो 'रुद्र' (रू.भे.)


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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