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राब  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.स्त्री.
1.बाजरी, जवार या मक्की आदि के आटे को छाछ में पका कर बनाया जाने वाला एक पेय पदार्थ।
  • उदा.--1..पहियां राब न पावही, पड़ौ बीज उण पौळ। ऊ फळसौ रहजौ अडग, दूधां दहियां छौळ।--बां.दा.
  • उदा.--2..नीत रीत सूमां नहीं सबाब। सूमां घरै सुगाळ, में रंधै रसोड़ै राब।--बां.दा.
2.आंच पर पका कर गाढा किया हुआ गन्ने का रस जो गुड़ से पतला व शीरे से गाढा होता है।
3.राबड़ी
4.कोई गाढा पेय पदार्थ। अल्पा., राबड़ी ।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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