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रारंग, रार, रारि, रारी
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.स्त्री.
सं.राजृ=दीप्तौ=रात्रिका
1.नेत्र, आंख। अ.मा., ना.डिं.को.)
उदा.--
1..बारंगां उमंगां रंगां बिमाणंगा सोक बाज,
रारंगा
अभंगां भड़ां दमंगां रौ सार। पनंगां विहंगां ढंगां नारगां अभीच पड़ा, सारंगां खतंगां अंगा मातंगां धू सार।--बद्रीदास खिड़ियौ,
उदा.--
2..नवहत्थौ मत्थौ बडौ, रोस भटक्खै
रार।
औ कूंभाथळ ऊपरा, हाथळ वाहणहार।--बां.दा.
उदा.--
3..यां मुख झूठी आख नैं, पूगौ साह दवार। अरज हुवतां असपती, कीधी रत्ती
रार।
--रा.रू.
उदा.--
4..कहि कै नैहौ कौ करां, रांम कमळ री
रारि।
करै पुकारां पीर कवि, औ वाराह उधारि।--पी.ग्रं.
उदा.--
5..रोड़ बजि हैवरां आगि धकि
रारियां,
धजर भाला खेवण त्रभागौ धारियां।--जालमसिंघ मेड़तिया रौ गीत,
उदा.--
6..
रारियां
सुभट तूटै दमंग रीस रा। त्रिलोचण जिसा खूटै नयण तीसरा।--र.ज.प्र.
उदा.--
7..ऊपाड़ै नर वाहणां, आसी सौ ताबूत।
रारी
व्रन्नां चोळ मुख, साह धखै जमदूत।--नैणसी
2.वृद्ध मादा ऊंट।
3.देखो 'राड़' (रू.भे.)
नोट:
पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।
राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास
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