HyperLink
वांछित शब्द लिख कर सर्च बटन क्लिक करें
 

रिद्धि  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.स्त्री.
सं.ऋद्धि, प्रा.रिद्धि
1.लक्ष्मी देवी।
2.पार्वती देवी।
3.कुबेर की पत्नी जो नल कूबर की माता थी।
4.गणेश की अनुचरी एक देवी।
5.वरूण की पत्नी।
6.एक अलौकिक शक्ति।
7.धन, द्रव्य, सम्पत्ति, निधि, पूंजी।
  • उदा.--1..रिद्धि न मांगू सिद्धि न मांगू, मुक्ति न मांगू बडाई। साधु संगत मांगत हूँ देवा, क्रपा कर बगसाई।--स्री सुखरांमजी महाराज,
  • उदा.--2..एतलौ धन तौ दीसै नहीं, क्याई थी काढइ छै सही, तेह नै पासे छै कांई सिद्धि, खरचतां खूटै नइं रिद्धि।--विनय कुमार कृत कुसुमांजलि,
  • उदा.--3..पुत्र कलत्र धण यौवन रिद्धि, देव लोक नी अनंती सिद्धि। संसार मांहि सहू सलंभ, जिण सासण एक छइ दुरल्लभ।--वस्तिग
8.ऐश्वर्य, वैभव।
9.सफलता।
10.वृद्धि, बढ़ोतरी।
11.पूर्णता।
12.एक लता विशेष, जिसका कंद औषध के काम आता है।
14.वैद्यक में अष्ट वर्ग के अन्तर्गत एक औषधि।
15.आर्या या गाथा छन्द का भेद विशेष जिसमें प्रथम चरण में 6 दीर्घ वर्ण सहित
12.मात्राएं द्वितीय चरण में आठ दीर्घ और दो हृस्व सहित 16 मात्राएं और चतुर्थ चरण में 7 सात दीर्घ वर्ण एक हृस्व 15 मात्राएं कुल 57 मात्रा का छंद विशेष।
रू.भे.
रिद्ध, रिद्धी, रिध, रिधि, रिधी, रिधु, रिधू, रीध, रिध्धि, रुद्धि।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

Project | About Us | Contact Us | Feedback | Donate | संक्षेपाक्षर सूची