सं.स्त्री.
सं.ऋद्धि, प्रा.रिद्धि
1.लक्ष्मी देवी।
3.कुबेर की पत्नी जो नल कूबर की माता थी।
4.गणेश की अनुचरी एक देवी।
7.धन, द्रव्य, सम्पत्ति, निधि, पूंजी।
- उदा.--1..रिद्धि न मांगू सिद्धि न मांगू, मुक्ति न मांगू बडाई। साधु संगत मांगत हूँ देवा, क्रपा कर बगसाई।--स्री सुखरांमजी महाराज,
- उदा.--2..एतलौ धन तौ दीसै नहीं, क्याई थी काढइ छै सही, तेह नै पासे छै कांई सिद्धि, खरचतां खूटै नइं रिद्धि।--विनय कुमार कृत कुसुमांजलि,
- उदा.--3..पुत्र कलत्र धण यौवन रिद्धि, देव लोक नी अनंती सिद्धि। संसार मांहि सहू सलंभ, जिण सासण एक छइ दुरल्लभ।--वस्तिग
12.एक लता विशेष, जिसका कंद औषध के काम आता है।
14.वैद्यक में अष्ट वर्ग के अन्तर्गत एक औषधि।
15.आर्या या गाथा छन्द का भेद विशेष जिसमें प्रथम चरण में 6 दीर्घ वर्ण सहित
12.मात्राएं द्वितीय चरण में आठ दीर्घ और दो हृस्व सहित 16 मात्राएं और चतुर्थ चरण में 7 सात दीर्घ वर्ण एक हृस्व 15 मात्राएं कुल 57 मात्रा का छंद विशेष।
रू.भे.
रिद्ध, रिद्धी, रिध, रिधि, रिधी, रिधु, रिधू, रीध, रिध्धि, रुद्धि।