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रेवति, रेवती  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.स्त्री.
सं.रेवती
1.रेवत मनु की माता का नाम।
2.राजा रेवत की पुत्री तथा बलरामजी की पत्नी जिससे बलराम के निशठ और उल्मुक नामक दो पुत्र उत्पन्न हुए थे। वि.वि.--राजा रेवत अपनी पुत्री के लिए सर्व गुण सम्पन्न योग्य वर की खोज में अपनी पुत्री को साथ लेकर ब्रह्म लोक गये। उस समय वहां पर गीत और नृत्य होने के कारण राजा रेवत को दो एक क्षण वहां रुकना पड़ा। राजा रेवत का निवेदन सुन कर ब्रह्मा ने कहा कि आपको यहां रहते हुए सत्ताईस चतुर्युग व्यतीत हो गए हैं। अब द्वापुर युग में भगवान्‌ का अंशावतार बलराम द्वारका में रहते हैं। यह नारीरत्न को उन पुरुष श्रेष्ठ बलरामजी को दीजिये। ब्रह्मा को वंदना कर अपनी सुकुमारी पुत्री का पाणिग्रहण बलराम के साथ कर दिया। बलराम की मृत्यु होने पर रेवती भी उनके साथ चिता में अग्नि प्रवेश कर सती हुई थी।
3.महर्षि भरद्वाज की बहन जो अत्यन्त कुरूप थी और भरद्वाज ने अपने कठ नामक शिष्य को विवाह में दी थी। यह गोदावरी में स्नान करके रूपवती हो गई। जहां पर स्नान करके इसने सौन्दर्य प्राप्त किया था वह स्थान रेवती नामक तीर्थ हो गया।
4.अश्विनी आदि सत्ताईस नक्षत्रों के अन्तर्गत अन्तिम नक्षत्र। इसका अधिष्ठाता पूषा नामक सूर्य है।
5.एक मातृका का नाम।
6.एक बालग्रह विशेष जो बच्चों को दुःख देता है।
रू.भे.
रेवत्ति।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






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