सं.पु.
सं.लेह्य
1.भोजन, आहार (अ.मा.)
2.आनन्द, मजा।
- उदा.--1..हँसज्यौ कसज़़्यौ खेलज्यौ, लीज्यौ जीवन लेह। पलक न न्यारां पोढज्यौ, नाजक धण रा नेह।--बगसीरांम प्रोहित री बात
3.चाटकर खाई जाने वाली वस्तु।
4.ग्रहण का एक भेद जिसमें पृथ्वी की छाया सूर्य को जीभ के समान चाटती हुई प्रतीत होती है।