सं.स्त्री.
1.आटे की रोटी बेलने हेतु बनाया गोलीनुमा अंश।
2.स्त्रियों के ओढने का एक खास रंग में रंगा हुआ ऊनी वस्त्र।
- उदा.--1..लोई ओढण नै साड़ौ लूंमाळौ, फूटर लटकंतौ नाड़ौ फूँदाळौ। पावां पचडोरी पगरखियां पैरै, सूरत सिंघण सी बन जगळ बैरै।--ऊ.का.
- उदा.--2..अंबर धावळ आंगी, सिर लोई सोहै।--मे.म.
- उदा.--3..लोई सिर फाबत धावळ लंक, चमूं पर सावळ सूळ चमंक।--मे.म.
3.देखो 'लोवड़ी' (रू.भे.) मह.--लोवड़।
5.प्रसव के पश्चात् स्त्री या बच्चे के की जाने वाली मालिश।
6.देखो 'लोही' (रू.भे.)
- उदा.--खरी नींद में खाज, मूढ खिण बैठै मारै। नख लांबा सूं निठुर, लोई काढै ललकारै।--ऊ.का.
- मुहावरा--लोइर् मरणौ=कायरता आना। लोई ठसणौ=खून जमना, आश्चर्य चकित होना। लोइर् पीवणौ=रक्तपान करना, परेशान या दुःखी करना, कष्ट देना। लोई भरीजणौ=पशुओं से अधिक परिश्रम लेने के बाद किसी बंद स्थान पर बांधने से रक्त संचार का बंध हो जाना।