सं.स्त्री.
देशज
1.पहाड़ के नीचे की भूमि, लम्बी भूमि।
- उदा.--पंवारां री पैंतीस साख, त्यां मांहै एक साख भायलां री, भायलां रौ माथासरौ गांव रोहीसी मगरा नीचै वळी छै तठै नै सिवांणचीनूं।--नैणसी
2.रेतीलै टीबै पर प्राकृतिक रूप से बनी लहरनुमा उभरी रेखाएं ।
4.सीधा रोपा जाने वाला वह काष्ठ का डंडा जिस पर धनुषाकार लकड़ी रखकर उस पर बैठकर चक्कर काटा जाता है। वि.वि.--देखो 'चकचूंदियौ'
6.वह धर्मात्मा और महात्मा व्यक्ति जो ईश्वर की दृष्टि में प्रिय और मान्य हो।
7.शासक, बादशाह।
- उदा.--अकबर साह जलालदी, खितवा वली खुदाय। वाजदार कर बंदगी, ताजदार हुय जाय।--बां.दा.
9.देखो 'वळि' (रू.भे.)
- उदा.--1..एक सुयखंध इणि अंग नउजी, वरग छइ आठ अभिरांम। आठ उद्देसा छइ वली जी, संख्याता सहस पद ठांम।--विनय कुमार कृत कुसुमांजलि
- उदा.--2..अगनि में बांण छूटा असंख, वळी वीढ़ चिहुँवै वळां। पछि वांण हुवौ पूठीरुखौ, 'गजण' तांम दिल्ली दळां।--गु.रू.बं.
- उदा.--3..जासक कटक आंपणइ ठांमि, गुजराति आवसइ अनांमि। करि वीबाह मनि आंणी रुली, छपन कोडि धन देसइ वली।--कां.दे.प्र.