HyperLink
वांछित शब्द लिख कर सर्च बटन क्लिक करें
 

वासव  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.पु.
सं.वासव:
1.इन्द्र का नाम, इन्द्र। (ना.डिं.को., नां.मा., ह.नां.मा.)
  • उदा.--1..व्रज राखियौ विगौयौ वासव। वडौ अवर कुण विसन वड।--ह.नां मा.
  • उदा.--2..दीजै जोड़ किसौ न्रप दौलत, राज विभौ अवरेख। मात सुखां भुगतै दिन साजा, वासव हूत विशेष।--र.रू.
  • उदा.--3..इण बें विधि वासव विध विध भजै, इणरी महिमा कहै महेस।--गी.रां.
2.महादेव, शिव। (नां.डिं.को.) वि.(सं.वसव)--इन्द्र का, इन्द्र सम्बन्धी।
रू.भे.
बासब, बासव, वासिव।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

Project | About Us | Contact Us | Feedback | Donate | संक्षेपाक्षर सूची