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विरुदावळी, विरुदावली  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.स्त्री.
सं.
1.कीर्तिगान, यशवर्णन, प्रशंसा।
  • उदा.--1..राजवियां नै ओळखै रे, जांणै देस विदेस रे। वंस तणी विरुदावळी, संभळावै सुविसेस रे।--स्रीपाळरास
  • उदा.--2..देवकी माता आदै रांणिया, साथै सहू परिवार। बोलै विरुदावलियां, चारण सुजब सब, जय जय शब्द अपार।--जयवांणी
  • उदा.--3..रथ बेठी नै संचरी, हुवौ खाड़ेती भ्रात। भाटण देवै विरुदावली, आरीसौ लेई हाथ।--जयवांणी
2.विरुदों या गुणों का संग्रह, गुणावली।
  • उदा.--विरुदावळी हसती वरीस अवनीस, लाख सांसण कोड़ि वरीस अडंड डंडण अंगंजी गंजण, अनमी असूत ताहि न्रमी भूत करण। सवळ रायथांन उथापण, निरजोर राय सहाय करि थापण। खंड खंड खुरासांण कौ मांण हीण करण, वेद मुजाद की म्रजाद असरण के सरण।--रा.रू.
रू.भे.
बिरदावळी, बिरुदावळी, ब्रदाळी, विडदावळ, विडदावळी, विरदावळी।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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