सं.स्त्री.
सं.
1.कीर्तिगान, यशवर्णन, प्रशंसा।
- उदा.--1..राजवियां नै ओळखै रे, जांणै देस विदेस रे। वंस तणी विरुदावळी, संभळावै सुविसेस रे।--स्रीपाळरास
- उदा.--2..देवकी माता आदै रांणिया, साथै सहू परिवार। बोलै विरुदावलियां, चारण सुजब सब, जय जय शब्द अपार।--जयवांणी
- उदा.--3..रथ बेठी नै संचरी, हुवौ खाड़ेती भ्रात। भाटण देवै विरुदावली, आरीसौ लेई हाथ।--जयवांणी
2.विरुदों या गुणों का संग्रह, गुणावली।
- उदा.--विरुदावळी हसती वरीस अवनीस, लाख सांसण कोड़ि वरीस अडंड डंडण अंगंजी गंजण, अनमी असूत ताहि न्रमी भूत करण। सवळ रायथांन उथापण, निरजोर राय सहाय करि थापण। खंड खंड खुरासांण कौ मांण हीण करण, वेद मुजाद की म्रजाद असरण के सरण।--रा.रू.
रू.भे.
बिरदावळी, बिरुदावळी, ब्रदाळी, विडदावळ, विडदावळी, विरदावळी।