सं.पु.
सं.विरोध
1.बेमेल होने की अवस्था, बेमेलपन।
- उदा.--साहमी सुं संतोख करीजइ, वयर विरोध निवार जी। सगपण तै जै साहमी केरउ, चतुर सुणौ सुविचार जी।--स.कु.
2.शत्रुता, दुश्मनी, वैर।
- उदा.--1..साका विगर नांम न रहै सु एक साकौ कीजै। तरै मूळराज, रतनसी नै दूदै साकै री निसचै करी, नै पातसाह सूं विरोध वधावण री करै। पिण वीकमसी करण न दै।--नैणसी
- उदा.--2..बळौवळी बीरहक नौपतां नंगारां बागी, सेना पीठ लागी जोस धारियां सक्रोध। उबबरां आसमांण भुजांटां सेल री अण्यां, वेखौ कस वंस माथै तड़िता विरोध।--बादरदांन दधवाड़ियौ
- उदा.--3..आगलां जाळंधर महाजोधार सारिखां रा वैर कळियां काढां। भसमासुर रा विरोध मांहै इंद्रादिक देवता वाढां।--मा.वचनिका
3.लड़ाई, झगड़ा, युद्ध।
- उदा.--1..आदर विरोध अवरंग सूं, थिरस बोध सुर थप्पियौ। ऊधरां भड़ां 'अजमाल' रां, असुरां डर ऊथप्पियौ।--रा.रू.
- उदा.--2..यूं कंमधज धरै धू अंबर, ज्यूं गंगा मेळै जोगेसर। आदर जोध विरोध असंका, बंट रतन्नै ज्यां सुर बंका।--रा.रू.
4.वह प्रयत्न जो किसी कार्य आदि को रोकने हेतु किया जाता है।
- उदा.--वरसाळै रौ मौकौ, ऊंट री असवारी, सा'बनै समैरी भेंट दाय आयगी। ई रै सागै चुनाव रै विरोध हाळी दरखास्त जकी म्हैं अगरवाळां रै कै'णै सूं फाड़ दीजकै रौ ही जिकर कर्यौ अर मनै दोसी साबत कर दियौ।--दसदोख
7.भिन्न-भिन्न तथ्यों में पाया जाने वाला तत्व जो स्वाभाविक रूप से एक दूसरे के विपरीत हो, ज्यूं-दूध अर नींबू
12.एक अर्थालंकार, जिसमें जाति, गुण, क्रिया और द्रव्य में से किसी के साथ विरोध पाया जाता हो।
13.अनान्तक का पिता व वात नामक राक्षस का पुत्र।