सं.पु.
1.मनबहलाव की क्रियाएं।
2.देखो 'विलंब' (रू.भे.)
- उदा.--1..राई वेगई चढि आवौ, विलम न करौ बार। सोल सइयर रूकमणी सारीखी लेज्यौ साथ।--रुकमणी मंगळ
- उदा.--2..विलम बिना विलूंबी मेरी, नहीं अधर नहिं धरता। आद रु अंत मध्य नहीं मेरै, नहिं उरै परै मेरी सुरता।--स्रीहरिरांमजी महाराज
3.देखो 'वल्लभ' (रू.भे.)
- उदा.--भंवरा घेर र भूवन मै, राख्यौ विनां रहूं न। वाडी म्हांरी रौ विलम, खूंनी कर गयौ खूंन।--अज्ञात
4.देखो 'विलोम' (रू.भे.)
- उदा.--महण वन दहण 'केसर' गहण मंडियौ, तेण खग वहण घण सघण तणियौ। महातम विलमां उडावण मारुवौ, वडखत्री तरण चै रूप वणियौ।--किसोरदांन बारहठ
1.प्रेमाशक्त।
- उदा.--सुण बाळा, इक रैण पौढती कंठ लगांणी, जागी जजकां, नैण विलखतां नीर भरांणी। पूछतां, मुळकाय कह्या थैं बोल सयांणी, 'छळिया! पेख्यौ तूझ विलमणौ नार विरांणी।--मेघ
3.कार्य में लग कर भूलने वाला।
विलमणौविलमां उडावण मारुवौ, वडखत्री तरण चै रूप वणियौ।--किसोरदांन बारहठ विलमणौ