सं.पु.
सं.विलास
1.क्रीड़ा, खेल।
- उदा.--1..न्रप सुख ग्रीखम निरखतां, वधि बरसात विलास। मातौ कादंब मेदनी, आयौ भाद्रव मास।--रा.रू.
- उदा.--2..सबळा खथ सूं सांधियां, निबळ जाय खळ नास। मूंसौ मेळ मंजार कर, वचियौ विपत विलास।--बां.दा.
2.अनुराग या प्रेमपूर्ण क्रीड़ा, आमोद-प्रमोद।
- उदा.--1..यौं नरपति पुर आपरै, नित प्रति महल निवास। सुख अनुराग छ राग सुख, वाग तड़ाग विलास।--रा.रू.
- उदा.--2..तठा उपरांति राजांन सिलांमति रितिराज बसंत वैसाख मास रा मंगळाचार विमांह रा सुख बिलास करतां सरदरित आई छै। आसोज मास आइ संप्रापती हुअै छै।--रा.सा.सं.
- उदा.--3..इण भांत सुख-सेजै पौढिया। राति विहांणी। प्रभात हुवौं छै। रातौ का कांम उजागर नैण घुळि नै रहिया छै। कपोळै कांम सुहाग री छाप लागी छै। खुलि नै रही छै। इण भांत सुख विलास करतां छै रित बारै मांस मांणीजै छै।--रा.सा.सं.
3.शोभा, सुन्दरता, मनोहरता।
- उदा.--वळवळ कंठ विलास, हार भुजंग गंग सिर खळहळ।--र.ज.प्र.
4.स्त्रियोचित हाव-भाव नाज-नखरा आदि जो काम-वासना को उत्तेजित करने वाली होती है।
- उदा.--वर नारि नेत्र निज वदन विलासा, जांणियौ अंतहकरण जई। हसि हसि भ्रूहै हेक हेक हुइ, ग्रह बाहरि सहचरी गई।--वेलि.
5.आनन्द, प्रसन्नता, हर्ष।
7.मनोरंजन, मनोविनोद।
- उदा.--1..सु आगली सखिआं, नूं जावती लखै नहीं छै। लखाव नहीं पड़तौ छै। तिणि सौंधैरे डोरै लगी जाए छै। ऊजळी ठकुरांणी ऊजळा ठाकुर प्रीतम सुं जाइ जइ मिळै छै। इण भांति सरद चांदणी रंग विलास मांणीजै छै।--रा.सा.सं.
8.संयोग श्रृंगार का एक भाव विशेष, जिसमें नायक के सामने नायिका उसके मन में अपने प्रति अनुराग या प्रेम उत्पन्न करने की क्रियाएं या चेष्टाएं करती है। (साहित्य)
9.भोग विलास, विषय भोग, मैथुन।
- उदा.--1..बोलै बंधव रूपसी, बोलै मोकमदास। तज अवसांण बिलास पद कौ मांनै ध्रम जास।--रा.रू.
- उदा.--2..निस वसियौ सुख ग्र्रेह निज, आधै रमणि विलास। अरज करै मुख औरतां, हित रिति गरम हुलास।--रा.रू.
- उदा.--3..कुसमति कहतां फूली। कुसमायुध कहतां कांम देवतै कै उदै करि केलि विलास खेल तै कै अरथि जांहका भरतार घरै छै। सु तौं वसंत विखै फूली छै।--वेलि.टी.
10.सुख भोग, आनन्द भोग।
- उदा.--1..स्रीनरनाथ विलास सूं पूरण कियौ वसंत। देखैवा दिल्ली नयर, भायौ कूच निभ्रंत।--रा.रू.
- उदा.--2..धरम बंभ लघु भ्रात हेत धरि, कासीराज तेणि दीधौ करि। हित देखै न्रप राग हुलासी, करै विलास इंद्र जिम कासी।--सू.प्र.
- उदा.--3..सोरंभा सोधा सरस, राग रंग अति हास। ब्रह्मा ब्रह्मांणी सहत, निज पुर करत विलास।--गजउद्धार
- उदा.--4..राजपाट सुत वित सबै, सूंदरि महल विलास। हरिया हरि सुख बाहिरौ, ज्युं जंगळ का घास।--अनुभववांणी
12.एक तपस्वी जिसकी मुक्ति 'विमल ज्ञान' की प्राप्ति से हुई थी।
13.प्रिय वस्तु के दर्शनादि से गति, स्थिति आसन आदि की तथा मुख, नेत्रआदि के व्यापारों की विशेषता या विलक्षणता।
14.शिल्पक के सत्ताईस अंगों में से एक।
रू.भे.
बिलास, बेलस, बेळास, विलासा।