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विवर  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.पु.
सं.
1.सर्प, चूहों व चींटियों के रहने का स्थान, छिद्र बिल।
  • उदा.--1..इक कहै चीटी एह, छित लखौ सुख अणछेह। वस रही संग परवार, घर विवर घर निधार।--रा.रू.
  • उदा.--2..सींह जिम अडर डर अनामि 'सिबसाह' हर, रिमां विखधर जिंहि समर गाहै। तेज खग-ईस री टकर लागी तिकां, रहै नह वारधर विवर मांहै।--राव देवीसिंघ सेखावत रौ गीत
2.कन्दरा, गुफा।
  • उदा.--1..च्यार घड़ी तलक च्यारूं रेढा घणा सखरा लड़िया। आदमी घणौ घायल हुवौ। सारा धाप रहिया अर आबू रा विवर पण भूंडण व रेढा री नजर आया। तद सारौ साथ उठै ऊभौ रहियौ। कुंअर नूं संभाळ घोड़ै सवार कियौ छै। इतरै भूंडणरेढौ। विवर जा बड़िया।--डाढाळा सूर री बात
  • उदा.--2..विखम घाट गोरख पखै, कवण पैसे विवर। चीत कुण रुदर वण जहर चाढै, असंक दैतां वचै जोधपुर 'ऊदला', कहर दरीया वसु-तुह-झ काढै।--मालौ सांदू
3.छेद, छिद्र।
  • उदा.--नाभि-विवर अति रुअडुं, धण नलीआरइ पेटि। उन्नत उर विसाल, पण भल तइ सकइ न भेटि।--मा.कां.प्र.
4.गर्त, गड्ढ़ा।
  • उदा.--1..अब विवर तनसीत सुतौ सब तीरथ न्हावै। कासी छाडै देह हेम बसि हाड़ गमावै।--ह.पु.वां.
  • उदा.--2..कनियां भोमि विवर लघु काया, आयस जेम दास धरि आया। वदियौ वळि धर मगन वाळ वय, जय मम वर, मम पिता पराजय।
5.दरार, खाई।
6.पाताल। (डिं.नां.मा.)
7.त्रुटि, गलती।
8.किसी ठोस पदार्थ में होने वाला खोखला स्थान।
9.घाव।
10.मूर्ख, नासमझ, विवेकहीन व्यक्ति। (ह.नां.मा.)
11.भूगर्भ, तहखाना।
  • उदा.--अर उहि रिति कै आवणै भुजंग जु सरप था। अर धनवंत मनुस्य था त्यां प्रथि का पुड़ विवरण करि ऊंडी ठौड़ां सबारि तहां ए दून्यौं वरग विवर कहतां भुंहिरा निखात ठोड़ तहां जाइ रहवासि कीधा।--वेलि.टी.
12.समुद्र , सागर। (डिं.नां.मा.)
13.व्यौरा, हाल, वृत्तान्त, विवरण।
  • उदा.--1..आखी जंग तणी कथ एती, सारी विवर अकब्बर सेती। अै राठौड़ हुवै ज्यां आगै, भिड़तां ऊला पैला भागे।--रा.रू.
  • उदा.--2..वाकौ ग्यौ अजमेर सूं, साह हजूर सताब। पत्र परखि (ठि) या साह डर, लिखिया विवर नबाब।--रा.रू.
  • उदा.--3..विगत सुणी सारी विवर, आया हितू हजूर। अरि भमरांणी आवियौ, दळां न वै था दूर।--रा.रू.
  • उदा.--4..कुवजा नारद विरद री, विवरां संजुत बात। हरि रा दासां ज्यूं हुए, दासां नूं सुख दात।--बां.दा.
14.धोखेबाज, कपटी व्यक्ति।
15.दूत, खबरनवीस।
  • उदा.--अबदुल्ला सुण बंधु अवाजा, रीत कही सुणतां महाराजा। पत्र दिया हित हूंत पठाया, समाचार सहि विवर सुणाया।--रा.रू.
16.नौ की संख्या।*
रू.भे.
बिंबर, बिंभर, बिंवर, बिब्बर, बिमर, बिम्मर, वमर, ववर, विमर, विम्मर, विवरण।
अल्पा.
वम्मरौ।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






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