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विस्मय  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.पु.
सं.
1.आश्चर्य, ताज्जुब।
  • उदा.--1..तद बखतसिंहजी विस्मय में पड़ अबोला सा रहिया।--मारवाड़ रा अमरावां री वारता
  • उदा.--2..बादल लै आदेस गौरा रावत तणौ, सुभट मिल्या तिहां जाय साहस मन में घणौ। देखि सभा सगली मनमइं विस्मय थई आवइ नहीं दरबार कदै क्यों आवई।--प.च.चौ.
2.अद्‌भुत रस का स्थायी भाव। (साहित्य)
3.अभिमान, अहंकार, गर्व।
रू.भे.
बिसमउ, बिसमय, बिसमै, बिस्मय, विसमय, विसमै, विसमौ, विसम्य, विस्मि, विस्मिय।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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