सं.पु.
सं.
1.आश्चर्य, ताज्जुब।
- उदा.--1..तद बखतसिंहजी विस्मय में पड़ अबोला सा रहिया।--मारवाड़ रा अमरावां री वारता
- उदा.--2..बादल लै आदेस गौरा रावत तणौ, सुभट मिल्या तिहां जाय साहस मन में घणौ। देखि सभा सगली मनमइं विस्मय थई आवइ नहीं दरबार कदै क्यों आवई।--प.च.चौ.
2.अद्भुत रस का स्थायी भाव। (साहित्य)
रू.भे.
बिसमउ, बिसमय, बिसमै, बिस्मय, विसमय, विसमै, विसमौ, विसम्य, विस्मि, विस्मिय।