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विहा
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
देखो 'विवाह' (रू.भे.)
उदा.--
1..सो खींवसी हळोद झालै परणीया। वडौ
विहा
हुवौ। बडौ गूडो खरच जस अवल कीयौ, बडौ नांव कियौ। झाली बडी ठाकुरांणी, जिसी ही रूप, जिसौ ही सहुर, जिसी ही सारी बात में सुधड़। सो खींवसी घणौ राजी।--कुंवरसी सांखला री वारता
उदा.--
2..आगै सहर में अेकै साह रै
विहा
थौ, तै रै महीनै री तयारी करावै छै, झठी कढाय कढा, चरु खुरपा, डहोला सारा बासण आंण हाजर किया, खांड रा कापा भेळा कर वेकी कर राखी, मैदौ घिरत सारौ काढ तयार कर राखियौ।--राजा भोज अर खापरे चोर री वात
नोट:
पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।
राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास
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