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व्योम  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.पु.
सं.व्योमन्‌
1.आकाश, आसमान। (डिं.नां.मा.)
  • उदा.--1..प्रपंच पंच तत्व कौ तुही उपावनी, क्षमाप वह्रि वायु व्योम तू खपावनी। ब्रहम्म की तुहीं रजा भुजा बलंदनी, नामांमि 'इंदरा' 'समद' नंदनी।--मे.म.
  • उदा.--2..पत्र सुधारै जोगणी, माळ सुधारै रंभ, । थंभ चलेबौ सोम रवि, पेखै व्योम अचंभ।--रा.रू.
2.जल, पानी।
3.भोडल, अभ्रक।
4.सूर्य का मंदिर।
5.बादल, मेघ।
6.शून्य।
7.विष्णु का नाम।
8.पवन, वायु, हवा।
9.नीला, आसमानी। * (डिं.को.)
10.यदुवंशीय राजा दशार्ह के पुत्र जो जीमूत का पिता था।
रू.भे.
बोम, बौम, ब्यौम, वयोम, वोम, वोमि, वौम।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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