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सजळ, सजल  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
वि.
संस+ज्वलनम्‌
1.प्रकाशयुक्त, ज्योतियुक्त।
  • उदा.--घर नीगुल दीवउ सजळ, छाजइ पूणग न माइ। मारू सूती नीद्र भरि, साल्ह जगाई आइ।--ढो.मा.
2.जज्वल्यमान, तेजपूर्ण।
  • उदा.--मुर नबाब दर मज्झि, जाब बोलिया अतारा। कळा प्रांण काबली, जांण सजला अंगारा।--रा.रू.
3.जलयुक्त।
4.आंसुओं से युक्त।
5.तरलता युक्त।
  • उदा.--देस निवांणू सजळ जळ मीठा बोला लोइ। मारू मांमण दिखणि धर, हरि दीयइ तउ होइ।--ढो.मा.
6.इज्जातदार।
7.देखो 'सुजळ' (रू.भे.)
8.देखो 'सज्जाळ' (रू.भे.) अल्पा;
रू.भे.
सजळौ।
(सं.सजल)


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






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