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सजीव  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
वि.
सं
1.जिसमें जीव हो, जीवयुक्त।
2.फुर्तीला, चंचल।
3.ओजस्वी।
4.पुनर्जीवित।
  • उदा.--1..इण रीति राजा वडाह रा अंग रौ समस्त पळ खाय तिण नूं पाछौ सजीव करि भगवति वर लेण रो हुकम दीधौ।--वं.भा.
  • उदा.--2..कळिजुग रा समय में प्रांण कढियांपछै सजीव होबा रौ सुभचित का मत में तौ असंभव ही आवै।--वं.भा.
1.प्राणी, जीवधारी व्यक्ति (सं.सजव)
2.घोड़ा, अश्व। (अ.मा.)
रू.भे.
सरजीव, सरजीवत।
सं.पु.--


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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