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सनस  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.पु.
1.लिहाज, ख्याल, ध्यान।
  • उदा.--1..सगपण ची सनस रुखमणी सन्निधी, अण मारिबा तणौ आलोजि। ए अखियात जु आउधि आयुध, सजै रुकम हरि छेदै सोजि।--वेलि.
  • उदा.--2..वरजै सनस ठांमि व्यापार, चालै अपणैं कुल आचार माइतां री आंण म खंडै, मोटां सेती हठ म मंडै।--ध.व.ग्रं.
2.इज्जात, मर्यादा।
  • उदा.--बल परहरै बना बध बोलै, सनस असा रौ धरसूत। रांण तुहाली पोळ रायमल, राजधणी सेवै रजपूत।--महारांणा रायमल्ल रौ गीत
3.चीज, वस्तु।
4.शंका, लज्जा।
  • उदा.--हमैं चौपड़ खेलै है प्रेममगन हुवा कठी री कठी सारि गोट मेलै है। बाजी बुलावै है, सनस खुलावै है, प्यारी री लालड़ी प्रीतम रौ हीरौ, प्यारी री चूंदड़ी प्रीतम रौ चीरौ।--र.हमीर
5.सनद, साक्षी। 6़- कीर्ति, यश।
  • उदा.--घाट पालट करै नाट रावत घणां, मेळि ऊभा गहै क मेळा। ऊजळी सनस सैसार सोहौ ऊपरै, चालियौ भोज खत्रीवाट चेळा।--राव भोज हाडा रौ गीत
  • उदा.--भड़ां किमाड़ निरब है भुवब्बळि, सार सु दनि 'ऊदा' सनस जुध आचारि अभनिमा 'जसवंत', जग दीपै ऊजळौ जस।--राठौड़ प्रथ्वीराज भीमोत रौ गीत
वि.
समान, तुल्य।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






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