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सल्य  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.पु.
सं.शल्य:
1.मद्रदेश का एक राजा जो माद्री का भाई व नकुल का मामा था। (महाभारत)
2.कंटीली झाड़ी।
3.शल्त्र चिकित्सा।
4.सीमा
5.एक प्रकार की मछली विशे। (सं.शल्यं)
6.कांटा।
7.कील, खूंटी।
8.हड्डी, अस्थि।
9.संकट, विपत्ती।
10.पाप, जुर्म।
11.जहर, विष।
12.छप्पय छंद का 58 वां भेद जिसमें 13 गुरु और 126 लघु से 139 वर्ण या 152 मात्राऐं होती हैं, मतान्तर से। 13 छप्पय छंद का 56 वां भेद जिसमें 15 गुरु और 122 लघु अर्थात्‌ 137 वर्ण या 152 मात्राऐं होती है। 14 देखो 'सल' (रू.भे.)


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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