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सांझ  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
देखो 'संध्या' (रू.भे.) (अ.मा; उ.र; डिं.को.)
  • उदा.--1..अमल री पिक लागी अटल, सुख लूअै वै सुलखणा। सवेरा सांझ दोनूं समै।, काझकंझ नै कुलखणां।--ऊ.का.
  • उदा.--2..हुवै चम्मरां झाटका जोति हूबै, सदा ऊतरै आरती, सांझ सूबै।--मे.म.


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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