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साख  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.स्त्री.
1.साक्षी, गवाही।
  • उदा.--1..इण मुख मांहै तौ जिसा, केई मावै लाख। मूढ म जांणै झूठ तूं, सूरज चंदौ साख।--गजउद्धार
  • उदा.--2..जौ कोई खून हुवै मुझ अंदर, तौ दूं साख भराई। पिण कहौ जुग मैं न्याय करै कुण, जौ हुवै राय अन्याई।--जयवांणी
  • मुहावरा--स्याळ री साख लांकी भरै=बदमाश या अपराधी की गवाही अपराधी ही देता है।
2.बाजार में वह प्रतिष्ठा जिसके कारण उसका लेन-देन तथा व्यापार कार्य अच्छा चलता हो, व्यापारिक ख्याति, प्रसिद्धि।
  • उदा.--चौखळा मैं उण रै नांव री साख ही। हजारूं रिपिया उणनै बिना खाता रै मिळ जाता अर वौ खुद तौ किणी नै लिखा-पढी री बात रिपिया देवती वगत करतौ ई नीं हौ।--फुलवाड़ी
3.इज्जात, प्रतिष्ठा।
  • उदा.--2..बात सुणनै सेठ बोल्यौ--गै'णौ तौ उणनै सूंपणौ ई पड़ैला सात पीढियां री साख जावै। जायनै सावळ समझा। यूं भोळप री बातां करियां घर री साख कीकर रेवैला।--फुलवाड़ी
4.आदर, सम्मान।
5.कीर्ति, यश।
  • उदा.--वण जौहर री राख, साख राखी जग ऊंचै। रजपूती भगती, बंधी कद कुळ रै पूंचै।--नारी सईकड़ौ
6.भाग, हिस्सा।
7.रश्मी, किरण।
  • उदा.--1..धीरौ रै ग्वाळा वीरा धीरज नूं लेय, सूरज री साखां मैं जास्यूं, रंग री कोटड़ी।--लो.गी.
  • उदा.--2..जै बींदणियां रै सत चढ्‌यौ है तौ आप सती करावौ। रोळौ न हुवै। यौ कांम आप रै जिम्मै है। सगळी बींदणियां रौ मन राखौ। सूरज री साख सती करायद्यौ।--नैणसी रौ साकौ
8.नाता, सम्बन्ध, रिश्ता।
  • उदा.--अर गढ रौ जोम होवै तौ फेर सांमांन करौ। म्हांरी फौज आवै छै। जिण सूं हाथ जोड़ज्यौ। अबरकै तौ छोडिया छ। जंमीदारां री साख सूं हर अबरकै चूकस्यौ तौ मार हीज नांखस्यूं।--प्रतापसिंघ म्होकमसिंघ री वात
  • उदा.--2..जाटां माथै मै'र, रोटी-बेटी रौ साख पाळै, रूखाळी करै। जाटणी रै जायै नै हेल नीं आणद्‌यै। हर बखत हिमरा चढतौ फिरै। लूँठा नै लोढै पर गरीबां रै मोढै लाग्यौ रैवै।--दसदोख
  • मुहावरा--(1) साख धोयां थोड़ा ई धुपै=रिश्ता मिटाने से नहीं मिटता है। (2) समझै ज्यांरौ साख नीतर कीं न कांई=माने उसके लिए सम्बन्ध अन्यथा कुछ नहीं। (3) समझणां सूं साख सगळा काढै= बुद्धिमान और समझदार व्यक्तियों से प्रायः सभी रिश्ता जतलाने के इच्छुक होते हैं एवं रिश्ता निकाल लेते हैं।
9.शिक्षा, उपदेश।
  • उदा.--सतपुरसां री साख सुण, सीखत ग्यांनी होय। हरीया गुर सबद बिन, ध्यांनी भया न कोय।--अनुभववांणी
10.फसल, उपज, पैदावार।
  • उदा.--1..दावौ पड़्‌योड़ी कै झोलौ लाग्योड़ी साख लुगथुकी पड़ै ज्यूँ 'बादळ' रौ डील लूखौ पड़ग्यौ। दीप दीप करतौ उणियारौ साव मगसौ पड़ग्यौ।--फुलवाड़ी
  • उदा.--2..झुकै धर हैमर सूर झूँझार, भयै किर साख तिडां दळ भार। इसी सरसौक नक्यूं अटकाय, आयौ 'अभपत्तिय' बाज उडाय।--सू.प्र.
11.विवाह, शादी।
12.सगाई, मंगनी।
  • उदा.--छोटू मारजा रै तीन बेट्‌यां, जकां मैं सूं बडोड़ी रौ साख डूंगरगढ रै एक पावर हाउस रै मस्तरी रै दसवीं पास बेटै सूं मंड्‌यौ है।--दसदोख
  • उदा.--कैयौ--थांरै घरांणै रौ नांमून सुण'र आपरी बाई रौ साख करण नै पधार्‌या है। थानै कुंवरजी वणावणा चावै है। मैरवांनी करावौ।--दसदोख
13.पैढी।
  • उदा.--अबार छोडूं तौ पचास रिपिया तौ म्हारी दुकान री साख रा ई आ जावैं।--फुलवाड़ी
14.वंश, गौत्र, शाखा।
  • उदा.--1..मालदै नूं मुवां थोड़ा दिन हुवा था सु चंद्रसेन कन्है साख साख रा सबळा रजपूत था।--राव चंद्रसेण री बात
  • उदा.--2..अमर सुजस दत खगि अधिकाई, साख 'पदम' री बधै सवाई।--सू.प्र.
  • उदा.--3..तुरक घडा नव तेरही, तेरह साख कमंध। इळ धूकळ कळि ऊपजै, ज्यां कपि दळ दसकंध।--रा.रू.
15.दरवाजे में कपाट के दोनों किनारों पर लगाई जाने वाली सीधी (खड़ी) लकड़ी।
16.एक साल की आयु वाला बैल।
17.किसी बड़ी जलधारा से निकली छोटी जलधारा।
18.अग्निशिखा।
  • उदा.--संपेख अगनग साख सी, रत रोस मारग राखसी। तिंह नाक पांण विछेद ताडै, बांण इक रघुबीर।--र.रू.
19.घोड़े के चारजामे का एक भाग।
  • उदा.--घोड़ा लोह चाब रह्या छै, जीणां री साखां जनाखां ऊंची नांखीजै छै। तंग खोळा कीजै छै।--रा.सा.सं.
20.प्रमाण, सबूत।
  • उदा.--1..कठै साख इण विध कही, सुणि इम कहै सुजांण। मांडै कायब माघ मधी, पंडित माघ प्रमांण।--सू.प्र.
  • उदा.--2..ऐसी भांति सै खटि भाखा कहि बताई। चातुरी कळा की भांति भांति चतुराई। जिसकी साख प्रथम भाखा संसक्रत सौं तौ अनुभूति क्रत्य सारस्वत सौ पाई।--सू.प्र.
21.स्वामी कार्तिकेय।
22.अनलवसु का पुत्र जो कार्तिकेय का छोटा भाई था।
23.देखो 'साखा' (रू.भे.) (डिं.को.)
  • उदा.--तुंही भारती भाखणी सख भाखा, तुही सरव दातार मंदार साखा। हमाऊ परां तोकरां छांह हेकौ, नकौ पार ओतार थारा अनेकौ।--मे.म.
रू.भे.
साक, साखि।
अल्पा.
साखड़ी।
क्रि.प्र.--घालणी, दैणी, भरणी।
विशेष विवरण:-देखो 'पेडी' (2) [सं.शाखा]


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






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