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साथ  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.पु.
1.संग रहने का भाव, संगत, सहचार। (डिं.को.)
  • उदा.--तेह्नि हूं जोती हींडू छूं, वन वन परवत ठांम। मन स्थिर राखु, हूं छूं दुखिणी साथ तणा तह्मौ स्वांमि।--नळाख्यांन
  • मुहावरा--1.साथ छूटणौ=अलग होना, जुदा होना।
  • मुहावरा--2.साथ देणौ=मदद करना, सहायता करना।
  • मुहावरा--3.साथ सोवणौ=संभोग करना।
2.संग रहने वाला, साथी।
  • उदा.--साथ तो छत्र्‌यां उतरीयौ छै। कंवर वीरमदै मरजीदांन खवास नै लै पनां कै म्हैल आयौ।--पनां
3.परिग्रह।
  • उदा.--1..साथ झुरै 'जसवंत' सह, दुखी अनाथ दयाळ। हाथ न आवै हे हरी, कमधां नाथ क्रपाळ।--ऊ.का.
  • उदा.--2..आइ नै रांणैजी रौ मुजरौ कियौ। सु ईयै भांत आया सुं राणा रौ साथ छिप गयौ नजर आरै नहीं।--देवजी बगड़ावत री बात
4.सेना, फौज। (अ.मा.; ह.नां.मा.)
  • उदा.--1..हाडा अखैराज समेत अल्प साथ सूं राजा भीम रै माथै प्रस्थान कियौ।--वं.भा.
  • उदा.--2..राः राजसिंघ सुरजमलोत मुः नैणसी राः सबळसिंघ प्रागदासोत नुं पोकरण री मदत वासतै घणां साथसूं विदा किया।--नैणसी
  • उदा.--3..जांमरा घोड़ा हजार 10000 आजमखांन कनै निपट सखरौ साथ।--नैणसी
  • उदा.--4..उठै सारंग खांन नूं मारियौ और ही सारंग खांन रौ घणौ साथ मारियौ।--नैणसी
5.समूह, झुण्ड।
  • उदा.--1..रीधौ साथां रैणवां, जस गाथा जेहल्ल। भारांणी बाथां भरै, आथां दिए अपल्ल।--बां.दा.
  • उदा.--2..सुचि नांमि विणजारौ बौलि, चेदि रायनि देस। साथ सहू ए विणजि जासि, सुबाहु यांहां नरेस।--नळाख्यांन
6.संग, साथ।
  • उदा.--1..आठ हजार फौज साथ लीन्ही भलौ चुणावौ साथ सागै लियौ।--मारवाड़ रा अमरावां री वारता
  • उदा.--2..लूंबां झड़ नदियां लहर, बक पंगत भर बाथ। मोरां सोर ममोळियां, सांवण लायौ साथ।--बां.दा.
7.संरक्षकता, मदद।
  • उदा.--विसरौ प्यालौ रांणाजी भेज्यौ, दीज्यौ मेड़तणी रै हाथ। कर चरणाम्रत पी गई, म्हांरै सबळ धणी रौ साथ।--मीरां
8.घनिष्ठता, मेल-मिलाप।
9.वंश, जाति। वि.--
1.सहित, पूर्वक।
  • उदा.--1..नबाब कासिमखांन, करीमखांन प्रमुख आपरा मुख्य सांमंत सहायक करि बडा बरूथ रै साथ जूझण रा साहसी कुमार दारा साह नूं औरंग, मुराद रै सांम्हौ बिदा कीधौ।--वं.भा.
  • उदा.--2..भाटी समुद्रसिंह आपरी सीमा मैं बसी रा लोकां सहित मीसणां नूं गोळ दिवाइ गिनायतां नूँ आदर रै साथ राखिया।--वं.भा.
2.शामिल, सम्मिलित, शरीक।
  • उदा.--मुहम्मदसाह बादसाह पठांण सांम्हौ चढियौ कमरुद्दीन खां नुँ लेय चढियौ जद ईस्वरीसिंह जयसिंहजी रौ पण साथ थौ।--मारवाड़ रा अमरावां री वारता
रू.भे.
सत्त, सत्थ, सत्थि, सत्ती, सत्थु, सत्तै, सथ, सथी, सथ्थ, सथ्थी। मह.--साथौ।
क्रि.प्र.--करणौ, राखणौ, व्हैणौ।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






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