HyperLink
वांछित शब्द लिख कर सर्च बटन क्लिक करें
 

साप     (स्त्रीलिंग--सापण, सापणी)  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.पु.
सं.सर्प प्रा.सप्प
एक प्रसिद्ध रेंगने वाला विषैला जन्तु, नाग, सर्प।
  • उदा.--1..साप नां नाथि आयौ घरै छोकरा, दही रौ दांण लै नंद रा डीकरा। तै हीज कंस राऊ रा दईत सहि त्रोड़िया, छाछि रै काजि छीका घणा छोडिया।--पी.ग्रं.
  • उदा.--2..कट्‌या घण सज्जाळ छज्जाळ कांन, सिरगिर कज्जाळ कूट समांन। ससूदित साप समाक्रत सुंड, दतूसळ मूसळ रूप दुरंड।--मे.म.
  • मुहावरा--1.छाती माथै साप फिरग्गौ=सदमा बैठना, अत्यधिक दुख होना.
  • मुहावरा--2.बंबी में बड़तां तौ साप ही सीधौ व्है=समय आने पर धूर्त व कपटी को भी सरल व सीधा होना पड़ता है.
  • मुहावरा--3.भोळायोड़ौ तौ साप ई नीं खावै=जिम्मेदारी का पालन करने के लिए त्याग करना पड़ता है.
  • मुहावरा--4.मर्‌यौ साप गळा में घाल्यां फिरणौ=किसी बात को व्यर्थ में पकड़े रहना.
  • मुहावरा--5.साप अंगूठा वाळौ मेळ व्हैणौ, साप आंगळी आळौ मेळ व्हैणौ=संयोगवश होना.
  • मुहावरा--6.साप ई मर जाय अर लाठी ई नीं भागै=बिना हानि या नुकसान के कार्य सफल होना.
  • मुहावरा--7.साप कद बिल खोदै=बलवान लोग गरीब व निर्बल का माल हड़पते हैं.
  • मुहावरा--8.साप खायौ नै पुरवाई चाली=कठिन कार्य में और कठिनाइयां आना.
  • मुहावरा--9.साप खाया नै अदीतवार कद आवै=उचित समय पर किसी चीज का न मिलना.
  • मुहावरा--10.साप गयां लीक कूटणी=परम्परावादी होना, रूढ़ीवादी होना.
  • मुहावरा--11.साप छछूंदर री गत व्हैणी=दुविधा में पड़ना.
  • मुहावरा--12.साप नै दूध पावणौ=दुष्ट व शत्रु का पालन करना.
  • मुहावरा--13.साप रा पग पेट में व्है=बुरे व्यक्ति की बुराइयां गुप्त होती है.
  • मुहावरा--14.साप रा मूंडा मैं पड़णौ=खतरे में पड़ना.
  • मुहावरा--15.साप री चाल चालणी=कपटपूर्ण व्यवहार करना.
  • मुहावरा--16.साप रौ कांई छोटौ अर कांई बड़ौ=दुश्मन चाहै छोटा या दुर्बल हो उसकी कभी उपेक्षा नहीं करनी चाहिये.
  • मुहावरा--17.साप रौ खायोड़ौ बिछ्‌यां सूं कांई डरै=बड़ी-बड़ी मुसीबतों का सामना किया हुआ व्यक्ति छोटी मुसीबतों से नहीं डरता.
  • मुहावरा--18.साप सळीट्‌या तौ केई देख्या पण इजगर तौ अबै इज देख्या=कई साधारण दुष्टों से सामना होने के बाद किसी भयंकर दुष्ट से सामना होना.
  • मुहावरा--19.साप सूं रमणौ=खतरनाक व्यक्ति से सम्पर्क करना, अत्यन्त खतरे का कार्य करना.
  • मुहावरा--20.सापां रै किसी सैंद अर ठगां किसी मितराई=दुष्ट अपनी दुष्टता नहीं छोड़ता वह तो हर किसी के साथ दुष्टता ही करता है.
  • मुहावरा--21.सापां रा ब्याव में जीभां रा लपळका=अभावग्रस्त से कुछ प्राप्त करने की उम्मीद करना.
  • मुहावरा--22.सापां रै किसा साख=दुष्ट व्यक्ति रिश्ते का लिहाज नहीं करते।
1.काला, श्याम। * (डिं.को.)
2.क्रूर। * (डिं.को.)
3.देखो 'सराप' (रू.भे.)
रू.भे.
संप, सांप।
अल्पा.
सपळोटियौ।
पर्याय.--अहि, आसीविख, उरग, कंचुकी, काकोदर, काळ, काळिंदर, कुंडळी, कुंभीनस, क्रतकाळ, गरळस, गूढपग, गूढपद, चक्री, चखस्रवा, चील, जिह्मग, जैहरी, दंदसूख, दरवीकर, दीरघपिस्ट, धैधींगर, नसदरवी, नाग, पनंग, पवनासण, पवनासनी, प्रदाक फकारौ, फणी, भमंग, भुजंग, भुजीस, भोगी, लेलहांन, वक्रगति, विखधर, विखहर, विलेसय, विलेसरी, विसधर, व्याळ, सरीस्रप, सारंग।
वि.--


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

Project | About Us | Contact Us | Feedback | Donate | संक्षेपाक्षर सूची