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सावळ, स़ावळ, सावल  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.स्त्री.
1.दुख या संकट के समय की जाने वाली देवी-देवताओं व ईश्वर की प्रार्थना।
  • उदा.--1..सावळ संत तणी सुण सांमी, ढळवळ सहज न धारै ढील। वचन उसीलां तणौ वसीलौ, वड दरबारां तणौ वकील।--ओपौ आढ़ौ
  • उदा.--2..बसु पूंगळपती रोकियौ बावळां, दियै लप चावळां त्रास देखै। आप जद पांवडा दीध ऊतावळां, सावळां करी जद राव सेखै।--खेतसी बारहठ
2.कहारों (कीर नामक) की जाति के अनुसार वह वस्तु जो खेत में सबसे पहले तोड़ कर किसी बहन या बेटी को दी जाय। (मा.म.)
3.शिल्पकारों का एक औजार विशेष जो सीध ई मापने के काम आता है। वि.--
1.उचित, ठीक।
  • उदा.--1..खासा दिंना तांई सेठ री वीणती साव अैळी गी तौ वौ कायौ होय जमराज री तिथ छोड आपरा मन नै समझावणौ ई सावळ जांणियौ।--फुलवाड़ी
  • उदा.--2..म्हैं तौ इत्ती सी बात जांणूं कै रावळै रूप रा दरसण व्हियां पै'ली घदी दौ घड़ी वास्तै निजर जावती परी तौ सावळ ही। किणी निजर वाळा नै आज पै'ली दीठ सारू अैड़ौ दुख नीं व्हियौ व्हैला।--फुलवाड़ी
2.पूर्ण, पूरा।
  • उदा.--पिंडतजी नै इत्ती ताळ मैं ईं सावळ जाच पड़गी कै बापजी रौ अंतस ई डील रा रंग सूं कम काळौ नीं है। अर अठी कांमेती सूं ईं आ बात छांनी नीं री, कै पिंडतजी लखणां रा पूरा पारवाड़ है।--फुलवाड़ी
3.ध्यानपूर्वक।
  • उदा.--सावळ मोती रौ मोती बुहारनै भंवारा मैं भर दै। सावळ सावचेती सूं, अैड़ी नीं व्है कै अेक ई मोती लारै रै जावै। सौ पचास मोती तौ म्हैं ईं गिट जावूं।--फुलवाड़ी
4.स्पष्ट, साफ।
  • उदा.--1..मंगतौ बकाई खावतौ भप्प भप्प कीं बोल्यौ तौ उणनै सावळ जांच नीं पड़ै। दूजी वार वळै पूछ्‌यौ। अबै नांर सुभट सुणीजियौ--धनियौ।--फुलवाड़ी
  • उदा.--2..नाई राजाजी रौ सुभाव आछी तरै जांणतौ हौ। हाथ जोड़ बोल्यौ--अंदाता, सूरज रा उजास मैं चांद रै ऊगण री सावळ जांच नीं पड़ै। म्हैं रात रा मतै ई पिछांण करनै बधाई दै दूँला।--फुलवाड़ी
5.अच्छा, अनुकूल।
  • उदा.--पण भाग सावळ था तींसूँ पचास सवार रहिया। बाकी रा अगल-बगल आगै गया। खींबौ पाघ बांधणै रुकियौ थौ। तींसूं खांन री फतह हुई छै। प्रवाड़ौ हाथ आयौ।--सूरै खींबै कांधलोत री बात
6.बढ़कर, बहतर।
  • उदा.--वींदणी तौ ई नीं मांनी--थारै जैड़ा दुस्ट रौ मूँडौ देखणा बिचै तौ आडा दियोदा ई सावळ है। इण अकरम रौ बदळौ लियां छोडूंला।----फुलवाड़ी ज्यूं तूं म्हारै बिचै तौ सावळ है।
7.लाभप्रद, हितकर।
  • उदा.--भोळा बामण रै हीयै मतै ई आ समझ वापरगी कै साची बात बताया वळै राड़ बधैला, इण वास्तै घरवाळी सूं चोज राखणौ ई सावळ।----फुलवाड़ी ज्यूं रोगीला मिनख नै दिनूंगा दूध पायोड़ौ सावळ व्है।
8.स्वस्थ, तन्दुरुस्त।
  • उदा.--1..महीना दोय डाढाळौ भूंडण चील्हरां सूधां जव गुळवाड़ी चरतां नूं हुवा सो मोटा-ताजा, बळपूर मस्त हुवा। तरह-तरह री जड़ी-बूंटी खाधी थी तिण सूं जखम सावळ हुआ।--डाढाळा सूर री बात
  • उदा.--2..देख थूं तौ समझणौ है नीं भांणूं। बाई कितरा दिन घरै मांदी पड़ी री, अबै दवा नीं करावै तौ सावळ कीकर व्है बता? ठीक व्हैतांई म्हूं उणनैं लेयनैं आवूंला।--अमरचूंनड़ी
9.सीधा।
  • उदा.--इक चलै सूंड अदोळतां, अध ऊरध सावळ अविळ। तम सुभट विछोहौ जांणि तिम, दिवस वहै करि डंग बळि।----रा.रू.ज्यूं सावळ बैठौ।
1.अच्छी तरह, भली प्रकार से।
  • उदा.--1..थांनै आज वळै कैवूं, सावळ याद राखजौ कै औ देवाळौ अपांरी अणगिण माया बचावैला। अलेखूं मण नेपै अपांरै कोटां-कोठां लाय भरैला।--फुलवाड़ी
  • उदा.--2..फूंदी व्है ज्यूं कैर-कैर उडती फिरी। थोड़ी ताळ मैं राताचुट्ट ढालुवां सूं खोळौ भरनै पाछी आयगी। वुगती रा पांणी सुं बांनै सावळ धोया। ठार्‌या।--फुलवाड़ी
2.आराम से, चैन से।
  • उदा.--1..सेठांणी बोली--लांपौ लागै इण गैणा गांठा रै। सावळ सूवण ई नीं दौ। औ धन सुख रै वास्तै है कै कोई दुख रै वास्तै।--फुलवाड़ी
  • उदा.--2..कैवण लागी--देखौ थांरी सिंग्या परवारी है। हाल तौ थांरी ऊमर ई कांई व्ही। चाळीस रै मांय हौ, पण साठ बरसां रा व्है ज्यूं दीसौ। रात रा सावळ नींद आवै नीं।--फुलवाड़ी
3.सीधे तरीके से, शिष्ट व्यवहार से। ज्यूं--सावळ कैवणा सूं वौ रिपिया नीं देवेला।
रू.भे.
साउळ, साउल, सावड़, स्यावळ, स्यावल।
क्रि.वि.--


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






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