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सिरे, सिरै  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
वि.
श्रेष्ठ, बढिया।
  • उदा.--1..अथग अचळ धिन 'जोध' अभिनमा, सावज कुळ पैंतीस सिरै। हरि मेलियौ मथै हीलोहळ, गांजियौ रांवण मेर-गिरै।--किसनजी आढ़ौ
  • उदा.--2..छोटकी बीनणी सगळी बहुवां सूं सिरै है। नैड़ा नेड़ा चौखळा मैं ई इणरै जोड़ री दूजी बीनणी नीं लाधै।--फुलवाड़ी
2.मुख्य, प्रधान, खास।
  • उदा.--1..मांमै गढ रौ दरवाजौ ढाबियौ तौ भांणेज सिरै ड्‌योढी मैं डेरा किया।--अमरचूंनड़ी
  • उदा.--2..मिनख रै वास्तै जीभ सूं कीं बोलणौ ई तौ सिरै बात नीं है। मिनख री खास पिछांण तौ उणरै करतबां सूं व्है।--फुलवाड़ी
3.सिद्ध, सफल।
  • उदा.--राखवा राज पातसाह, रौं, यौं समाज भड़ उच्चरै। रस थयां बेळ महाराजरी, सकळ काज चढसी सिरै।--रा.रू.
  • उदा.--1..इम जीपै आवियौ 'गंग' वाजतमां नगारां, सुजस वधै धर सिरै, उछक छक वधै अपारां।--सू.प्र.
  • उदा.--2..अला लाछिवर पहिलड़ौ साच लीधौ, अला किसौ मेघां सिरै कोप कीधौ।--पी.ग्रं.
क्रि.वि.
पर, ऊपर, सर्वोपरि।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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