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सिरोही  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
वि.स्त्री.
सिरोही नगर की बनी। (तलवार)
  • उदा.--ठाकर व्है बहु जांण क समझै अख्खरां, सिरोही तरवार खणंक्कै बक्करां।--अज्ञात
1.एक प्रकार बढ़िया लोह, जिसकी तलवारे बनती हैं। सं.स्त्री.--
2.तलवार।
  • उदा.--1..तेरा नांम सादा तौ अभी लौ चोट झेलौ, पंजै जोर पाया तौ सिरोही दाव खेलौ।--शि.वं.
  • उदा.--2..अर इणरै माथै घणौ अमांमी सिरोहियां रौ फूल धारां रौ बाढ झड़सी।--प्रतापसिंह म्होकमसिंघ री बात
3.राजस्थान का एक प्रसिद्ध कस्बा।
रू.भे.
सीरोही।
सं.पु.--
विशेष विवरण:-वह दो प्रकार की होती है--पबाशाई और मानाशाई।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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