वि.
सं.सुघट
1.चतुर, निपुण, होशियार, बुद्धिमान।
- उदा.--1..झाली बड़ी ठकुरांणी, जिसौ ही रूप, जिसौ ही सहुर, जिसी ही सारी बात मैं सुघड़। सौ खींवसी घणौ राजी।--कुंवरसी सांखला री वारता
- उदा.--2..पांन पदारथ सुघड़ नर, अण तोल्या विकाय। जिम जिम पर भूयैं संचरै, (तिम) तिम मोल मुहुंगा थाय।--प.च.चौ.
2.समझदार, विचारवान, विवेकी।
- उदा.--1..जोई जुगत करम री कीरत जपी न मुख सूं जावै। सुघड़ सुणौं साधां रौ सुजस ऊमरदांन उडावै।--ऊ.का.
- उदा.--2..ताहरां वडारण महा चतुर सुघड़ थी, सौ दोनां ही रौ हेत देख रूप वय देख खुस्याल हुई।--कुंवरसी सांखला री वारता
3.अच्छा, बढ़िया।
- उदा.--महा कपूत मुलक रै, मांही, लैण सपूत लड़ाई नै। पोल मांय ऊमर पद पढ़ियौ, सुघड़ लेख सुघड़ाई नै।--ऊ.का.
4.जिसकी बनावट सुन्दर हो, सुनिर्मित, कलात्मक।
- उदा.--आंटा खावती रूंवाळी। लांबी भुजावां। धोळी सुघड़ बत्तीसी, जांणै पळकता मोती ई खराद उतर्या।--फुलवाड़ी
5.मधुर, प्रिय।
- उदा.--1..विविध बजंत्री बीण बजावै, सुघड़ झीण सुर सार। बोळौ कहै खीण व्है वंचक, हीण बजावण हार।--ऊ.का.
- उदा.--2..सुघड़ जठै बोली या नवेली, सहल सारै ही सिधावज्यौ। पण बाग वन सरोवर, कदै भी मत जावज्यौ।--रा.सा.सं.
6.स्वरूपवान, सुन्दर।
- उदा.--जहां अंब नहीं वाग नहीं, फूलै न फुलवाई। रांग रंग जहां नहीं, नहीं जहां सुघड़ लुगाई।--दूलजी जोइयै री वारता
7.जिसकी स्मरणशक्ति तीव्र हो।
8.सुशिक्षित। सं.पु.--लखपत पिंगल के अनुसार राजस्थानी का एक छन्द विशेष।
रू.भे.
सुगड़, सुगड़ौ, सुगठ्ठ, सुगर, सुग्घड़ौ, सुघड़ौ, सुघड़, सुघर।