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सुध  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.स्त्री.
सं.शुद्ध
1.चेतना, संज्ञा, होश।
  • उदा.--1..मारौ मार मचायां मनवौ, आप एक घर आवै। एक ठौड़ आयां सूं अनुभव, बस सुध बुध बिसरावै।--ऊ.का.
  • उदा.--2..उसाकाळ उठणियां बाळक, विद्या विकास पावसी। सुध बुध विमळ सरीर सिरसूं, गीत नीत रा गावसी।--टाबर सईकड़ौ
2.बुद्धि, ज्ञान। (अ.मा.)
3.ध्यान, ख्याल, विचार।
4.खबर, पता, जानकारी।
  • उदा.--1..बाप नै सौ बातां री सुध ही। इण वास्तै वौ बेटी नै समझावण सारू आयौ कै मोट्‌यार रौ रूप नीं देखीजै।--फुलवाड़ी
  • उदा.--2..जोड़ी एक पस्चिम दिसा जयसलमेर थटौ मुलतांन सूं लाहोर मांही कर आया पण घोड़ी री कठै ही सुध नहीं हुई।--सूरै खींबै कांधळोत री बात
5.याददाश्त, स्मृति, स्मरण।
  • उदा.--बिरछां बेलां पर चढणैं बुधि चाही। उरमैं अलबेलां बेलण सुध आर्ई।--ऊ.का.
6.देखभाल, सार-सम्हाल, खोज-खबर।
  • उदा.--भौसागर मैं वही जात हूं, बेग म्हारी सुध लीज्यौ जी।--मीरां
7.नीयत।
8.राह, मार्ग।
  • उदा.--आथणी बीसमी किसौ अबअवरचौ, समी घर सेख रै बणी सादी। सिंध मुलतांण री सुध लै सिधाया, दूध तू संवारै पियै दादी।--गोपीनाथ गाडण
9.डिंगल का एक छन्द विशेष।
रू.भे.
सुद, सुदि, सुद्धि, सुद्धी, सुधि, सुधी।
10.देखो 'सुद्ध' (रू.भे.)
  • उदा.--1..ईखै पित मात एरिसा अवयव, विमळ विचार करै वीवाह। सुंदर सूर सीळ कुळ करि सुध, नाह किसन सरि सूझै नाह।--वेलि.
  • उदा.--2..सु किण भांति री ढालां सुध गैंडौ घणां री मारी बधै, मुहरतौलौ रंग लागै।--रा.सा.सं.


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






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