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सेठ     (स्त्रीलिंग--सेठाणी)  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.पु.
सं.श्रेष्ठिन्‌
1.प्रतिष्ठित एवं श्रेष्ठ व्यक्ति।
2.धनी व्यक्ति।
3.व्यापारी, महाजन, साहूकार, वणिक।
  • उदा.--1..सेठ हाथ जोड़ नै उरबांणै पगां दौड़्‌या सांमी आया। ठाकरसा नै सैठ अणूंता दुमना निगै आया।--फुलवाड़ी
  • उदा.--2..लियां दियां बिनां कैड़ाई मोटा सेठ रै सरै कोनीं।--फुलवाड़ी
  • उदा.--3..पण धनवंती सेठ साहूकारां रा तौ उण परवांना पछै हौसला इज गुम व्हैगा हा।--फुलवाड़ी
4.वणिक या व्यापारी की उपाधि।
5.दलाल।
6.व्यापारियों की पंचायत का मुखिया।
रू.भे.
सेट, सेठि।
अल्पा.
सेठड़ौ, सेठियौ, सेठौ।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास

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