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सेण
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.स्त्री.
1.औजारों की धार को घिसकर तेज करने का पत्थर या कांच का टुकड़ा, सिल्ली।
2.देखो 'सैण' (रू.भे.)
उदा.--
ज्यांरी जीभ न ऊपड़ै,
सेणां
मांही सेत। वांरा कर किम ऊपड़ै, खळां घिर्यां बिच खेत।--बां.दा.
3.देखो 'स्येन' (रू.भे.)
नोट:
पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।
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